वीथी

हमारी भावनाएँ शब्दों में ढल कविता का रूप ले लेती हैं।अपनी कविताओं के माध्यम से मैंने अपनी भावनाओं, अपने अहसासों और अपनी विचार-धारा को अभिव्यक्ति दी है| वीथी में आपका स्वागत है |
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Sunday, 26 August 2012

स्‍त्री पुरुष का व्याकरण




स्‍त्री पुरुष का व्याकरण

तुम शेष थे
विशेष हो गए
'
मैं ' और 'तुम 'थे जुदा
कब 'हम 'के श्‍लेष ' हो गए

[
श्‍लेष का अर्थ है चिपकना। जब एक ही शब्द से अनेक अर्थ चिपके हुए हों या निकलते हों, तो उसे  श्‍लेष अलंकार कहते हैं।]

-Kavita Malviya

ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से दौड़ती रही और स्त्री-पुरूष व्याकरण भी बनता-बिगड़ता रहा कुछ ऐसे -

और जब हम
’
हम’ के श्‍लेष  हो गए
तो रूपक हुए उपमा
हम चाँद थे
अब चाँद-से हो गए
बदले उपमान
हम
चंद्रमुखी से
सूरजमुखी हो गए
और अब हुए
अतिश्योक्‍ति
क्योंकि मित्र
हम ज्वालामुखी हो गए !.....:)

-
सुशीला शिवराण (श्योराण)