वीथी

हमारी भावनाएँ शब्दों में ढल कविता का रूप ले लेती हैं।अपनी कविताओं के माध्यम से मैंने अपनी भावनाओं, अपने अहसासों और अपनी विचार-धारा को अभिव्यक्ति दी है| वीथी में आपका स्वागत है |

Saturday, 24 September 2011

अश्कों को समझाना है .......






टूटा दिल बहलाना है
अश्कों को समझाना है

अब ना बहायें ये दरिया
उन्हें न प्यार बरसाना है

उनके हसीं ख्यालों को
बस ख़्वाबों में लहकाना है

आईं थीं कभी बहारें भी
अब यादों को महकाना है

गुज़रे लम्हे आयेंगे याद बहुत
ग़म को सीने में दफ़नाना है

दिल में हो दर्द कितना भी
लबों से मगर मुस्काना है





12 comments:

  1. टूटा दिल बहलाना है
    अश्कों को समझाना है.. sundar abhivaykti....

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  2. शुक्रिया सागरजी ।

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  3. कल 26/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. बहुत-बहुत धन्यवाद यशवन्तजी !

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  5. दर्दीली भावनाओं से निकली सुंदर कविता बहुत अच्छा लगी.

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  6. बहुत-बहुत शुक्रिया भूषणजी ।

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  7. गुज़रे लम्हे आयेंगे याद बहुत
    ग़म को सीने में दफ़नाना है

    ...बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  8. टूटा दिल बहलाना है
    अश्कों को समझाना है.....बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  9. बहुत खूब कहा है ।

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