पेश हैं चंद शेर -
कभी लब हँस दिए कभी आँखों ने चुगली कर दी
कुछ इस तरह से इश्क की बात सरे आम कर दी
मत पूछ निगोड़ी आँखों ने क्या काम किया है
दिल ने चाहा संभलना, इन्होंने दग़ा किया है !
तू नहीं तो तेरी यादों ने घेरा है मुझे
कब, कहाँ तन्हा तूने छोड़ा है मुझे !
कुछ इस तरह से इश्क की बात सरे आम कर दी
मत पूछ निगोड़ी आँखों ने क्या काम किया है
दिल ने चाहा संभलना, इन्होंने दग़ा किया है !
तू नहीं तो तेरी यादों ने घेरा है मुझे
कब, कहाँ तन्हा तूने छोड़ा है मुझे !
तुम से दूर हुए तो आज जाना हमने
ज़िस्म बाकी रहा खो दी धड़कन हमने
माफ़ करो ख़ता, गिले-शिकवे भुला के आओ
आओ फिर से बरखा की तरह झूम के आओ
-सुशीला शिवराण
