वीथी

हमारी भावनाएँ शब्दों में ढल कविता का रूप ले लेती हैं।अपनी कविताओं के माध्यम से मैंने अपनी भावनाओं, अपने अहसासों और अपनी विचार-धारा को अभिव्यक्ति दी है| वीथी में आपका स्वागत है |

Saturday, 5 May 2012

कुछ हाइकु ....


कहा जाता है कविता ह्रदय की अनुभूति और अभिव्यक्‍ति है। काव्य अपना मार्ग स्वयं चुनता है। ये भाव हाइकु के माध्यम से अभिव्यक्‍त हुए। प्रस्तुत हैं कुछ हाइकु -

१)
स्वयं समृद्ध
भ्रष्‍टाचार पोषित
देश बीमार !



२)
साहित्य शिव
राजनीति है विष
ना कर मेल !



३)
गुटबाज़ी है

साहित्य का नासूर
हो उपचार !

४)
गुटबाज हैं
श्‍वेतांबर पे कलंक
शारदे जाग !


५)
टिप्पणी कैद

संचालक के हाथ
लेखक पस्त !


६)

आपकी सोच
हुई है पराधीन
आप ज़हीन !


७)
एकलव्य तू
श्रद्धा की पराकाष्‍ठा
द्रौण हैं मौन !


-
सुशीला शिवराण
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11 comments:

  1. सभी हाइकु सत्य को कहते हुये ॥


    एकलव्य तू
    श्रद्धा की पराकाष्‍ठा
    द्रौण हैं मौन !

    बहुत पसंद आई

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  2. वाह................
    बहुत सुंदर एवं सार्थक हायेकु सुशीला जी.

    सादर.

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  3. एकलव्य तू
    श्रद्धा की पराकाष्‍ठा
    द्रौण हैं मौन !

    बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति // बेहतरीन हाइकू, //

    MY RECENT POST ....काव्यान्जलि ....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

    MY RECENT POST .....फुहार....: प्रिया तुम चली आना.....

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  4. . एकलव्य तू
    श्रद्धा की पराकाष्‍ठा
    द्रौण हैं मौन........ बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति........सुशीला जी...

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  5. साहित्य शिव
    राजनीति है विष
    ना कर मेल ..

    वाह ... कुछ शब्दों का जादू ...

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  6. साहित्य शिव
    राजनीति है विष
    ना कर मेल !

    कमाल के हाइकु हैं...बधाई...

    नीरज

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  7. टिप्पणी कैद
    संचालक के हाथ
    लेखक पस्त !
    ...
    एकलव्य तू
    श्रद्धा की पराकाष्‍ठा
    द्रौण हैं मौन !... कमाल , हाइकु में पूरा सार

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  8. साहित्य शिव
    राजनीति है विष
    ना कर मेल ..
    सारगर्भित हाइकू सभी सुंदर हैं

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  9. एक से एक बढ़कर हैं अर्थपूर्ण और प्रासंगिक .....!

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