कहा जाता है कविता ह्रदय की अनुभूति और अभिव्यक्ति है। काव्य अपना मार्ग स्वयं चुनता है। ये भाव हाइकु के माध्यम से अभिव्यक्त हुए। प्रस्तुत हैं कुछ हाइकु -
१)
स्वयं समृद्ध
भ्रष्टाचार पोषित
देश बीमार !
२)
साहित्य शिव
राजनीति है विष
ना कर मेल !
१)
स्वयं समृद्ध
भ्रष्टाचार पोषित
देश बीमार !
२)
साहित्य शिव
राजनीति है विष
ना कर मेल !
३)
गुटबाज़ी है
साहित्य का नासूर
हो उपचार !
४)
गुटबाज हैं
श्वेतांबर पे कलंक
शारदे जाग !
५)
टिप्पणी कैद
संचालक के हाथ
लेखक पस्त !
६)
आपकी सोच
हुई है पराधीन
आप ज़हीन !
गुटबाज हैं
श्वेतांबर पे कलंक
शारदे जाग !
५)
टिप्पणी कैद
संचालक के हाथ
लेखक पस्त !
६)
आपकी सोच
हुई है पराधीन
आप ज़हीन !
७)
एकलव्य तू
श्रद्धा की पराकाष्ठा
द्रौण हैं मौन !
-सुशीला शिवराण
